25 Nov 2017
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बसपा उत्तर प्रदेश स्टेट यूनिट की बैठक के अहम फैसले

बसपा उत्तर प्रदेश स्टेट यूनिट की बैठक के अहम फैसले

August 10, 2017 03:03 PM
बसपा उत्तर प्रदेश स्टेट यूनिट की बैठक के अहम फैसले

बी.एस.पी. द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति-दिनांक 10.08.2017
(1)  बी.एस.पी. उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख पदाधिकारियों व जिम्मेवार कार्यकर्ताओं की आज यहाँ हुई विशेष बैठक में बी.एस.पी. मूवमेन्ट के लिये पूरे तन, मन, धन से काम करने के साथ ही ‘‘बी.एस.पी. का सपना, सरकार हो अपनी‘‘ की अलख को जगाये रखने का संकल्प दोहराया गया ताकि बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के सपने को पूरा किया जा सके। 
साथ ही, दलित व पिछड़ा-विरोधी जातिवादी व साम्प्रदायिक सत्ताधारी बीजेपी से लड़ने के बजाय बी.एस.पी. को ही कमजोर करने में लगे रहने वाले स्वार्थी व गुलाम मानसिकता वाले भीतरघाती तत्वों से सावधान रहने की भी अपील।
(2) बीजेपी एण्ड कम्पनी की घोर जातिवादी, संकीर्ण व साम्प्रदायिक नीतियों, कार्यकलापों एवं इनके गुप्त एजेण्डे के कारण खासकर गरीबों, दलितों व पिछड़ों की उपेक्षा एवं इनका तिरस्कार काफी ज्यादा बढ़ा है तथा इन वर्गों का हित व कल्याण एवं सशक्तिकरण हर स्तर पर बुरी तरह से लगातार प्रभावित हो रहा है, जो देशहित के लिये अति-चिन्ता की बात है।
(3) साथ ही, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोगों को भी हर प्रकार से भयभीत व आतंकित करके उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक जैसा जीवन व्यतीत करने का माहौल बनाया जा रहा है, जिसके विरूद्ध भी संर्घष ज़रूरी।
(4) बी.एस.पी. बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के कारवाँ की देश में एक मात्र सशक्त राजनैतिक पार्टी है। इसने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं तथा इसकी राजनीतिक व सामाजिक सफलता पर विरोधियों के सीने पर साँप लोटना स्वाभाविक, परन्तु अम्बेडकरवादी लोगों के संकल्पों को इन्हें कभी भी झुकाया या खत्म नहीं किया जा सकता है, यह पूरा देश जानता है।
(5) बीजेपी की सरकार द्वारा शहरों, स्टेशनों, सड़कों आदि का नाम बदला जाना भी इनकी संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व फासीवादी सोच का परिणाम है जबकि बी.एस.पी. की सरकारों में नये ज़िले, नये तहसील, नये संस्थान, पार्क व स्थल आदि बनाकर उनका नया सुन्दर नामकरण किया: बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश एवं पूर्व सांसद सुश्री मायावती जी।
लखनऊ, 10 अगस्त, 2017: बी.एस.पी. उत्तर प्रदेश स्टेट यूनिट के अन्तर्गत  आने वाले सभी मण्डल, जिला व विधान सभा यूनिट आदि के समस्त प्रमुख पदाधिकारियों व जिम्मंेवार कार्यकर्ताओं की आज यहाँ हुई विशेष बैठक में बी.एस.पी. मूवमेन्ट के लिये पूरे तन, मन, धन से काम करने के साथ-साथ ‘‘बी.एस.पी. का सपना, सरकार हो अपनी‘‘ की अलख को जगाये रखते हुये उसके लिये हर प्रकार का संघर्ष अनवरत जारी रखने के दृढ़ संकल्प को पुनः दोहराया ताकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अधूरे मानवतावादी संवैधानिक सपने को इस देश में पूरा किया जा सके।
बी.एस.पी. उत्तर प्रदेश स्टेट कार्यालय 12 माल एवेन्यू में आयोजित इस बड़ी बैठक में हर स्तर के फीडबैक के आधार पर यह महसूस किया गया कि बीजेपी एण्ड कम्पनी व इसकी पैतृक संगठन आर.एस.एस. की घोर जातिवादी, संकीर्ण व साम्प्रदायिक नीतियों, कार्यकलापों एवं इनके गुप्त एजेण्डों के कारण खासकर गरीबों, दलितों व पिछड़ों की उपेक्षा एवं इनका तिरस्कार सरकारी स्तर पर भी काफी ज्यादा बढ़ा है तथा इन वर्गों का हित व कल्याण एवं सशक्तिकरण हर स्तर पर बुरी तरह से लगातार प्रभावित हो रहा है। जिससे ’’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’’ का मिशनरी लक्ष्य बुरी तरह से पिछड़ने लगा है, जो देशहित में बड़ी चिन्ता की बात है। इसके अलावा दलित व अन्य उपेक्षित वर्गों के मन में आज यह सवाल है कि देश में इन वर्गों की अपनी सरकार क्यों नहीं?
इतना ही नहीं बल्कि बीजेपी एण्ड कम्पनी द्वारा खासकर दलितों व मुस्लिमों को हर प्रकार से भयभीत व आतंकित करके उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक जैसा जीवन व्यतीत करने को मजबूर करने वाला भीषण माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके विरूद्ध भी बी.एस.पी. का संघर्ष स्वाभाविक है क्योंकि बहुजन समाज के दोनों अभिन्न अंगों के बीच आपसी एकजुटता व भाईचारा उच्च संवैधानिक लक्ष्यों की प्रप्ति हेतु जरूरी है। 
इस विशेष बैठक को मुख्य अतिथि के तौर पर सम्बोधित करते हुये बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश एवं पूर्व सांसद सुश्री मायावती जी ने कहा कि बीजेपी व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सरकार के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि अनेकों हथकण्डों के साथ-साथ असंवैधानिक व अलोकतान्त्रिक नीति व व्यवहार के कारण आज देश में हर तरफ भय, आतंक, हिंसा, बेचैनी व एक प्रकार से अफरातफरी जैसा माहौल है।
सर्वसमाज में से खासकर ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों, युवाओं, बुद्धजीवी व व्यापारी वर्ग के साथ-साथ दलितों, पिछड़ों व मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति हर प्रकार की सरकारी उपेक्षा व भेदभाव तथा नाइन्साफी आज पूरा देश महसूस कर रहा है जिसके तहत् देश में कल्याणकारी कानून व मानवतावादी संविधान को एक प्रकार से फेल करने की साज़िश की जा रही है। इन वर्गों के प्रति बीजेपी सरकार का रवैया लगातार निरंकुश व दमनकारी होता जा रहा है जिससे पूरा देश चिन्तित है, परन्तु इसे महसूस कर आवश्यक सुधार करने के बजाय बीजेपी की सरकार का अहंकार देश को लगातार त्रास्दी की तरफ अग्रसर कर रहा है।
सुश्री मायावती जी ने कहा कि बी.एस.पी. एक राजनीतिक पार्टी के साथ- साथ एक मिशनरी मूवमेन्ट भी है, जो बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के कारवाँ की देश में एक मात्र सशक्त राजनैतिक पार्टी है। इसने अपने राजनीतिक सफर में अबतक काफी उतार-चढ़ाव देखें हैं, परन्तु बी.एस.पी. की असलियत यह है कि इसने ना बिकने वाला एक शक्तिशाली समाज बनाया है जो बाबा साहेब डा. अम्बेडकर व मान्यवर श्री कांशीराम जी की असली इच्छा थी और यही कारण है कि खासकर उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. ने सत्ता की मास्टर चाबी चार बार अपने हाथ में लेकर अपना उद्धार स्वयं करने के बाबा साहेब के सपने को जमीनी हकीकत में बदलने का काम किया है, जिससे जातिवादी ताकतों के सीने पर साँप लोटता रहता है और वे इस  बी.एस.पी. मूवमेन्ट को पीछे धकेलने के लिये हर प्रकार की साजिशें लगातार करते रहते हैं। 
इसी का एक परिणाम यह है कि लगातार बेहतर वोट प्रतिशत प्राप्त करने के बावजूद भी बी.एस.पी. 2014 के लोकसभा आमचुनाव में कोई सीट नहीं जीत पायी तथा सन् 2017 के विधान सभा आमचुनाव में अपेक्षा से काफी कम सीटें जीत पायी, यह सब पार्टी की कमजोरी से ज्यादा उन साजिशों का ही परिणाम है जो बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व के खिलाफ लगातार की जा रही है ताकि अम्बेडकरवादी कारवाँ को सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने से दूर रखा जा सके। लेकिन यह स्थिति हमेशा बरकरार रहने वाली नहीं है।
इन चुनावी नतीजों का ही दुष्परिणाम है कि आज देश व उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में बीजेपी एण्ड कम्पनी की संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व जनविरोधी सोच वाली सरकारें हैं और समाज के कमजोर, उपेक्षित व शोषित वर्ग के लोगों पर हर प्रकार की जुल्म-ज्यादती, अन्याय, शोषण, भेदभाव आदि के पहाड़ टूट रहे हैं और इन लोगों की गुलामी, लाचारगी के अंधकार में दोबारा धकेलने का प्रयास लगातार किया जा रहा है तथा इनके खिलाफ लोकतान्त्रिक तरीके से आवाज उठाने पर तानाशाही रवैया अपनाकर इनकी आवाज को संसद तक में कुचला जा रहा है। 
इतना ही नहीं बल्कि बीजेपी की नफरत की राजनीति अब इतनी ज्यादा कट्टरवादी व द्वेषपूर्ण हो गयी है कि विरोधी पार्टी के नेताओं के खिलाफ जानलेवा हमले भी करवाये जा रहे हैं, यह सब लोकतंत्र के लिये शुभ लक्षण कतई नहीं है जिसके विरूद्ध लोगों को सचेत व संगठित करना बहुत जरूरी है। इस प्रकार की अक्रामकता व अराजकता इसलिये जारी है क्योंकि बीजेपी सरकारें इन्हें शह व संरक्षण दे रही है।
बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोग सत्ता में आने के बाद संसद के प्रति भी जवाबदेह होना पसन्द नहीं कर रहे हैं तथा आर.उस.एस. के अपने ’गुप्त एजेण्डे’ व जनविरोधी नीतियों व कार्यों पर से लोगों का ध्यान बांटने के लिये सरकारी मशीनरी का घोर दुरुपयोग करके बी.एस.पी. व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं को भ्रष्ट साबित करने के लिये अनेकों प्रकार के षड़यन्त्र करते रहते हैं, लेकिन बी.एस.पी. का नेतृत्व बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के संकल्पों के फौलाद से ढला हुआ है। बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की फौलादी शख्सियत देश में अकेली व अनोखी थी जो नदी की धारा को मोड़ देती थी और उसी प्रकार बी.एस.पी. को भी सताया तो जा सकता है परन्तु उसे झुकाया या तोड़ा नहीं जा सकता है, यह बात पूरा देश जानता है और बीजेपी एण्ड कम्पनी को भी यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिये। अम्बेडकरवादी ना तो झुक सकता है और ना ही उसे डराकर तोड़ा अथवा खरीदा जा सकता है।
जैसाकि सर्वविदित है कि बीजेपी एण्ड कम्पनी का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दोगला व जन-विरोधी का रहा है और इसका बड़े-बड़े पूँजीपति व धन्नासेठों का अंधसमर्थक व्यवहार आज भी लगातार जारी है, जिसे खासकर अंग्रेजी मीडिया लगातार उजागर करता रहता है, परन्तु ये लोग सस्ती लोकप्रियता व मुखौटा के तौर पर ’’राम-राम जपते’’ रहते हैं और इसकी आड़ में सारे फासीवादी व जन-विरोधी काम करते रहते हैं, जिससे आज पूरा देश पीड़ित महसूस कर रहा है।
बीजेपी की सरकार द्वारा शहरों, स्टेशनों, सड़कों आदि का नाम बदला जाना भी इनकी उसी संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व फासीवादी सोच का परिणाम है। नये शहर, नये जिले व नये संस्थान बनाकर उनका नया नामकरण का वाजिब लोकतान्त्रिक व सम्मानित स्वभाव बीजेपी का आचरण कभी भी नहीं रहा है। इनकी संकीर्ण सोच हमेशा ही केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाली व समाज में तनाव पैदा करके राजनीतिक रोटी सेंकने वाली होती है और इसी क्रम में नाम बदलने आदि की इनकी ओछी हरकतें भी लगातार जारी है जबकि बी.एस.पी. की सरकारों में व्यापक जनहित को मद्देनजर रखते हुये नये जिले, नये तहसील, नये विश्वविद्यालय, नये स्थल, नये स्मारक, नये शिक्षण संस्थान, नये पुलिस जोन व पुलिस रेंज आदि स्थापित करके उनका नया नामकरण करने किन्तु जिला मुख्यालयों का पुराना नाम ही लागू रहने का ऐतिहासिक काम किया था जो प्रशासनिक उत्तमता के मामले में आजतक अपनी मिसाल आप है। बीजेपी सरकार को नाम बदलने की गलत परम्परा व ओछी एवं नीची हरकतों से बचना चाहिये।
उन्होंने कहा कि हमेशा की तरह आज भी असली वास्तविकता यही है कि बीजेपी व आर.एस.एस. के संकीर्ण जातिवादी व साम्प्रदायिक जहर को केवल बी.एस.पी. की अम्बेडकरवादी विचारधारा व जनसंघर्ष ही काट सकती है और इसके लिये बी.एस.पी. कृतसंकल्प होकर काम भी कर रही है और इसके लिये अगले महीने से ही देश के स्तर पर जनचेतना व संघर्ष कार्यक्रम भी घोषित कर दिया गया है जिसकी शुरूआत उत्तर प्रदेश में दिनांक 18 सितम्बर सन् 2017 को मेरठ में पहले मण्डल-स्तरीय बी.एस.पी. ’’कार्यकत्र्ता महासम्मेलन’’ से होगी।
साथ ही, बेहतर अपराध-नियंत्रण व उत्तम कानून-व्यवस्था बीजेपी के डी.एन.ए. में नहीं है। यही कारण है कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद लोगों व वीर जवानों का भी जीवन असुरक्षित हुआ है और उत्तर प्रदेश की आमजनता को तो इसकी सबसे ज्यादा दुःख-तकलीफ व समस्या झेलनी पड़ रही है, जिसके विरू़द्ध बी.एस.पी. का जनसंघर्ष लगातार जारी है और आगे भी जारी रहेगा। ऐसे माहौल में सभी प्रकार के स्वार्थी व गुलाम मानसिकता वाले भीतरघाती तत्वों एवं खासकर सत्ताधारी बीजेपी एण्ड कम्पनी के हाथों का खिलौना बनकर बी.एस.पी. मूवमेन्ट को कमजोर करने वाले लोगों से सावधानी बहुत जरूरी है। 
जारीकर्ता:
बी.एस.पी. राज्य कार्यालय उ.प्र.
12 माल ऐवेन्यू, लखनऊ।

 


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